शहीद राजा शंकर शाह- कुंवर रघुनाथ शाह | Raja Shankar Shah- Kunwar Raghunath Shah -

1857 की क्रांती में अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर राजा शंकर शाह और उनके पुत्र उनकर रघुनाथ शाह गढ़ा के गोंड राजवंश के प्रतापी राजा संग्राम शाह के वंशज थे | इस राजवंश की कई पीढ़ियों ने देश और आत्मसम्मान के लिये आपने प्राण न्योछावर किये थे | राजा संग्राम शाह के बड़े पुत्र दलपत शाह थे जिनकी पत्नी रानी दुर्गावती और पुत्र वीरनारायण ने अपनी मात्रभूमि और अपने आत्मसम्मान की रक्षा करते हुए अकबर की सेना से युद्ध कर अपना बलिदान दिया | राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह दोनों ही बहुत अच्छे कवि थे और अपनी कवितों के माध्यम से लोगों में देशभक्ति का संचार करते थे | 14 सितम्बर 1857 की रात्रि अंग्रजों ने 20 घुड़सवार और 40 पैदल सिपाहियों के सांथ राजा की हवेली पर धावा बोल दिया और राजा शंकर शाह उनके पुत्र कुंवर रघुनाथ शाह और 13 अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया और पूरे घर की तलासी ली | जिसमे राजा द्वारा सरदारों और जमीदारों को लिखे गए पत्र और एक कविता हाँथ लगी |इसी तरह की कविता कुंवर रघुनाथ शाह की हस्तलिपि में भी मिली इन्ही कविताओं को आधार बनाकर उन पर देशद्रोह का मुकद्दमा चलाया गया |अदालत ने राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह को देशद्रोह की कवितायें लिखने , लोगों को भड़काने और देशद्रोह के आरोप में मृत्यु दंड की सजा सुनाई |राजा और राजकुमार को गिरफ्तार करने के मात्र 4 दिन के अन्दर ही 18 सितम्बर जबलपुर एजेंसी हाउस के सामने फांसी परेड हुई | दोनों की हाथकडियाँ खोल दी गईं और दोनों को तोपों क मुंह से बाँध दिया गया | तोप से बांधते राजा और राजकुमार दोनों तेजमय चेहरे के सांथ गर्व भाव से चलकर तोपों केसामने आये और दोनों ने सीना तानकर अपनी देवी की प्रार्थना की | तोप के चलते ही राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के शरीर छत-विक्षत हो गये |1857 की क्रांती में अपना अमूल्य योगदानदेने वाले अमर शहीद राजा रघुनाथ शाह और कुंवर शंकर शाह को हमारा शत-शत नमन् |